गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

कानपुर में जन संगठनों की एक मंच पर आने की पहल


नागरिक स्वतन्त्रता को बचाने के लिए शुरू हुए एक-जुट प्रयास
देश और कानपुर में नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वालों के दमन की बढती घटनाओं के विरोध में वामपंथी, सर्वोदयी. समाजवादी, मानवता वादी आंदोलनों से जुड़े लोग धीरे धीरे एक मंच पर आने की पहल शुरू कर दिए है. आज कानपुर खलासी लाइन शःस्त्री भवन में हुई एक बैठक में कानपुर शहर के संगठनो एंव मजदूर आन्दोलन से जुड़े सभी लो एकत्रित हुए. बैठक में ये बात प्रमुख रु से उभर कर आई की कानपुर में लगातार मानवाधिकार का उलंघन होने के साथसाथ नागरिक स्वतंत्रता का हनन हो रहा है. साथ ही इस मुद्दे पर संघर्ष करने वालो और इनकी आवाज को उठने वाले लोगो और संगठनों पर प्रशासन और सरकार द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है. ऐसे में ये जरुरी हो जाता है की कानपुर शहर में एक ऐसा मज़बूत मंच हो जो त्वरित करवाई करते हुए इस प्रकार के मामले को उठा सके और इसकी लड़ाई लड़ सके. ये तभी प्रभावी ढंग से सफल हो सकता है जब कानपुर के सभी जन संगठन और मानवता वादी लोग अपनी मतभेदों को छोड़कर इस मुद्दे पर एक मंच पर एक साथ आकर खड़े हो. इस बैठक में सभी लोगो ने मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन पर सरकार द्वारा किये जा रहे क्रूर दमन के विरोध में  अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा की आज जिस तरह से सरकार और प्रशासन विनायक सेन जैसे सैकड़ो लोगों को जेल में बंद कर मानवाधिकार के आवाज को चुप कराने की कोशिश कर रही है उस एयाही लगता है की आने वाले समय में देश का वो हर नागरिक जो मानवाधिकार या न्याय की बात करेगा वो विनायक सेन होगा आज पोलिस और प्रशासन की नजरों में हम सभी विनायक सेन है. कब किसको पोलिसे उठाकर बंद कर दे और झूठे अपराध में जेल भेज दे ये कोई नहीं जानता. जिस तरह से पोलिसे राजनेताओं की चमचा बनी है उसे देख कर तो यही लगता है इसका तजा उद्धरण है कानपुर का दिव्या और बंद का शीलू कांड जिसमे अपराधियों को पकड़ने के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही झूठे मुक़दमे गढ़ कर जेल भेज दिया.  बैठक में विजय चावला जी ने ये बात कही की जिस तरह से आज बड़ी बड़ी कंपनियों के हाथ हमारी सरकारे बिक गई है और सेज जैसी परियोजनाए आम आदमी के हितो का गला घोंट रही है साथ आम आदमी पर क्रूर दमन रवैया अपना रही है इस समय ये जरुरी हो जाता है की हमारे शहर में एक ऐसा मज्ब्बोत मंच हो जो नागरिक स्वतंत्र्य के मुद्दों को लेकर लड़ सके. इसलिए PUCL एक ऐसा मंच है जो लगातार देश भर के तमाम नागरिक स्वातन्त्र्य के मुद्दों को लेकर कई वर्षो से लड़ रहा है. कानपुर में हम PUCL कानपुर इकाई का गठन कर कानपुर में हो रहे तमाम मानवाधिकार के मुद्दों के लिए संघर्ष कर सकते है. बैठक में शामिल तमाम लोगो ने इस बात पर अपनी सहमति जताते हुए PUCL की कानपुर इकाई के गठन जरुरत महसूस की. बैठक में ये तय हुआ की आगामी १३ मार्च को एक बड़ी बैठक कर PUCL के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजन भाई और अन्य पदाधिकारियो के समक्ष PUCL कानपुर की इकाई का गठन किया जायेगा. इसकी वृस्तित रूप रेखा तय करने के लिए आगामी १२ फ़रवरी को एक बैठक करने का तय किया गया. बैठक में ये भी बातचीत की गई की शहर के प्रतिष्टित लोगो जैसे साहित्यकार गिरिराज किशोर, मानवती आर्य, सईद नकवी, बार असोसिएसन और ने लोगो को इस मंच पर लाने की पहल किया जाय जिससे एक मज़बूत और प्रभावशाली मंच बन सके जो नागरिक स्वतंत्र्य के मुद्दों को मजबूती से लड़ सके. आज के इस बैठक में दीपक मालवीय, विजय चावल, विष्णु शुक्ला, कुलदीप सक्सेना, छोटे भाई नरोना, संजीब ,शंकर भाई, योगेश, विष्णु अग्रवाल, नीरजा, पूजा, इश्तियाक अहमद, अनुराग, अजीत खोटे, रोबी शर्मा और अन्य लोग शामिल रहे.
Mahesh Kumar
"Asha" Kanpur

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1 टिप्पणी:

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