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रविवार, 12 अप्रैल 2009

आर0 टी0 आई0 भ्रष्टाचार के खिलाफ एक हथियार

आर0 टी0 आई0 भ्रष्टाचार के खिलाफ एक हथियार
आजादी के बाद सरकार द्वारा अब तक जितने कानून बनाये गये वो सभी कानून सरकार के नुमाइंदो द्वारा, इस देश के आम जनता से सवाल पूछने के लिए थे। लेकिन सन् 2005 में वर्तमान सरकार को अन्ततः जन आंदोलनों के दबाव के कारण आर० टी० आई० और नरेगा दो ऐसे कानून पास करने पड़े जो इस देश की आम जनता के लिए थे उसमें से एक कानून सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 ऐसा कानून पास हुआ जो इस देश के आम आदमी को सरकार और प्रसाशन से सवाल पूछने का अधिकार देता है। ये कानून आम तबके को इस देश का असली मालिक होने का एहसास करा दिया। अब आम आदमी काम न करने वाले अधिकारियों और कराये गये कामों के हिसाब - किताब पूछने के साथ ही साथ उन्हें कठघरे में भी खड़ा कर सकता है। ये कानून प्रशासन में व्यापत भ्रष्टाचार को रोकने और व्यवस्था तथा निर्णयों को पारदर्शी बनाने में मदद कर रही हैं। 13 अक्टूबर 2005 को सरकार ने जब इस कानून को पास किया और उसके बाद जब आम जनता ने इस कानून को सरकार और प्रशासन के खिलाफ हथियार की तरह उपयोग करने लगी तब वर्तमान सरकार के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को खतरा महसूस होने लगा। अन्ततः इन भ्रष्ट लोगों के दबाव में सरकार ने इस कानून को पंगु बनाने के लिए बदलाव का प्रस्ताव ला दिया। सरकार के इस निर्णय का देश के तमाम जन संगठनों, बुद्विजिवियों, समाज सेवियों, न्यायप्रिय और ईमानदार लोगों ने इसका खुलकर विरोध किया आखिरकार सरकार को इस जनाक्रोश के आगे झुकना पड़ा और इस कानून में बदलाव का प्रस्ताव स्थगित करना पड़ा। आज हर आम या खास आदमी अपने हकों के लिए इस कानून को भ्रष्टाचार के खिलाफ इस्तेमाल कर, इस देश के लोकतंत्र को मजबूत और सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।
महेश कुमार
सूचना का अधिकार अभियान, कानपुर