मंगलवार, 7 सितंबर 2010

सूचना के शहीद सिपाही अमित जाठवा और रामदास पाटिल को कानपूर ने दी सच्ची श्रद्धांजलि .........

RTI कार्यकर्ताओं की शहादत को श्रधांजलि
देश भर में लगातार RTI कार्यकर्ताओं की हत्या उत्पीड़न के मामलों में खासी वृद्धि हुई है। एक तरफ जहां सरकार सूचना अधिकार अधिनियम को फैलाने और विभागों में पारदर्शिता लाने की नसीहत दे रही है। वही दूसरी आम जनता को किसी भी मामलें में सूचना देकर उसका उत्पीड़न किया जा रहा है। बीते कुछ महीनों में RTI कार्यकर्ताओं की ताबड़तोड़ हुई
हत्याओं से देश भर के सामाजिक संगठनों में रोष व्याप्त हैं। गौरतलब है कि अहमदाबाद के RTI कार्यकर्ता ने गिरी के जंगलो में हो रही अवैध खनन के खिलाफ RTI का इस्तेमाल कर एक जन आंदोलन खड़ा किया। जो खनन माफियाओं को नागवार गुजरा और 20 जुलाई 2010 को इस RTI कार्यकर्ता अमित जाठवा की अहमदाबाद हाई कोर्ट के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं मराठवाड़ा में काम कर रहे RTI कार्यकर्ता रामदास पाटिल जो वहां पर अवैध बालू खनन और PDF प्रणाली में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ RTI का इस्तेमाल कर एक जन संघर्ष चला रहे थे, उनकी भी हाल ही में 27 अगस्त 2010 को मुम्बई में हत्या कर दी गई। दिन पर दिन सूचना मांगने पर मिलती मौत साथ ही उत्पीड़न के खिलाफ और RTI कार्यकर्ताआ की शहादत को याद करते हुए आज 6 सितम्बर 2010 को शाम 5 बजे गांधी प्रतिमा फूलबाग में श्रद्धांजलि अर्पित की गई।आज की शहादत श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत 2 मिनट का मौन रखकर शुरू की गयी। इसके बाद अपना घर के बच्चों ने गायेगा गायेगा जमाना गायेगा गीत गाकर गोष्ठी की शुरुआत की गोष्ठी के दौरान सरकार और जन प्रतिनिधियों से ये अपील की गई कि हत्यारोपियों को कठोर से कठोर सजा दिया जाय और देशहित में जान गंवाने वाले इन शहीद RTI कार्यकर्ताओं के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाय। साथ ही ये भी मांग की गई कि RTI कार्यकर्ताओं की हत्या और उत्पीड़न रोकने के लिए सरकार कोई गम्भीर कदम उठाये जिससे सूचना
अधिकार अधिनियम का इस्तेमाल आम आदमी बेखौफ होकर कर सके। सभा में कुलदीप सक्सेना ने कहा कि RTI कार्यकर्ताओं की हत्या सिर्फ व्यक्ति की हत्या नही बल्कि ये लोकतन्त्र की हत्या है और हम सभी इसका पुरजोर विरोध करते है। दीपक मालवीय जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि RTI कार्यकर्ताओं की शहादत की सच्ची श्रद्धांजलि सही अर्थो में तभी होगी जब इस देश का हर व्यक्ति RTI का इस्तेमाल करेगा। विजय चावला जी ने कहा कि ये एक लोकतन्त्र पर बड़ा हमला है। हमें इन साजिशों के अन्य तथ्यों को भी समझना पड़ेगा तभी हम इन ताकतों के खिलाफ सही तरीके से
लड़ सकेंगे आर0 टी0 आई0 कार्यकर्ता नरेश ने कहा कि अमित जाठवा और रामदास पाटिल की शहादत को हम बेकार नहीं जाने देंगे। इनकी खून की एक एक बूंद भ्रष्टाचार की ताबतू मेंअंतिम कील साबित होगी।
प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक और लेखक डॉ0 गिरीराज किशोर जी द्वरा मोमबत्ती जलाकर शहीद हुए RTI कार्यकर्ताओं को सच्चें अर्थो में श्रधांजलि अर्पित की गई। मोम्बत्ती जलाने के कार्यक्रम के दौरान जगदम्बा भाई ने गांधी ka priya
भजन रघुपति राघव राजाराम गाया। महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी स्थानीय प्रशासन के माध्यम से भेजा गया।
आज के इस श्रधांजलि भा में मुख्य रूप से डा0 गिरीराज किशोर, कुलदीप सक्सेना, विजय चावला, विष्णु शुक्लशंकर सिंह, नीरजा, डा0 0 सिद्दकी, इस्लाम आजाद, विष्णु अग्रवाल, नरेश, दीनदयाल, आदि ने शिरकत की। आज के श्रधांजलि कार्यक्रम में सचूना का अधिकार अभियान 0प्र0, जन चेतना कला मचं , लोक सेवक मडंल, जन सचूना जाग्रति मिशन, सचूना जनहिताय जागरूकता , सोवियर, एन0 0 पी0 एम, आशा, श्रामिक भारती, चित्रगुप्त सभा और अन्य मजदूर सगंठन तथा जनसगंठनों ने प्रमुख रूप से भागीदारी की

Mahesh

RTICUP Kanpur

10/425, Harihar Nath Shastri

Bhavan, Khalasi Line, kanpur

M0. +91-9838546900



गुरुवार, 6 मई 2010

मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत आवास के नाम पर धोखा

भूखे मरने से बेहतर है अपने हको के लिए लड़ कर मरना ......

(लखनऊ में सरकार द्वारा उजाड़ी गई बस्ती के लोगो को मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत आवास दिए जाने के नाम पर
उ०प्र० सरकार ने बस्ती के लोगो को धोखा दिया)

हमेशा से सरकार के झूठे आश्वासन पर जनता विश्वास करती चली आई है | लेकिन अब जनता को भी सब मालूम हो चुका है कि सरकार की नीति ही बुरी है | जो हमेशा झूठे आश्वासन के अलावा और कुछ भी गरीब जनता को नहीं दे सकती है | इसी झूठे आश्वासन के कारण ही आज शहर की आम जनता खुले आसमान के नीचे रह रही है | इस जनता को सभी मौलिक अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है | झूठे आश्वासन दे-दे के इनको हमेशा से अँधेरे में रखा जा रहा है | जिसका जीता जागता उदाहरण है- शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे ग़रीब बस्तियों के वो तमाम महिला-पुरुष | जो रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं | जिस दिन ये लोग मजदूरी नहीं करेन्गे शायद उस दिन इनके परिवार को खाना भी नसीब नहीं होगा | लेकिन सरकार को इन लोगों की कोई परवाह नहीं है हाल में ही इन लोगों को आश्वासन दिया गया था कि आप लोग मान्यवर कांशीराम शहरी गरी आवा योजना मेंफार्म भर दीजिये | जिसमे आपको निःशुल्क मकान दिये जायेंगे | गरीब जनता को क्या पता था कि यह हमारे साथ धोखा किया जा रहा है | भोली भाली जनता ने फिर एक बार इनके झूठे आश्वासन पर विश्वास कर लिया औरकाम-काज छोड़ कर सिर के ऊपर छत पाने का सपना देखने लगी | फार्म भरे गए | सरकारी कर्मचारियों द्वारा इनलोगों का सत्यापन भी किया गया | यह सत्यापन झूठी मानसिकता रखने वाले बड़े-बड़े अफसरों के इशारे पर किया गया था जो यह मान रहे थे कि शहर की इन बस्तियों में रहने वाले लोग बंगलादेशी हैं | सत्यापन में खुलासा भी हो गया कि ये लोग उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के रहने वाले गरीब मजदूर हैं जो रोजी रोटी की तलाश में शहरकी तरफ अपना मुख किया है | जाँच होने के बाद ये लोग निश्चिन्त हो गए कि चलो जो फार्म भरे गए थे उनकासत्यापन हो गया है | तो शायद अब मकान मिल ही जायेगा | लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था | पूरे डेड़ सालगुजर गया | लेकिन अभी तक इन्हें मकान और अन्य अधिकार नहीं मिले | अपने अधिकारों से वंचित औरसरकार की नीतियों से परेशान होकर आखिर इन लोगों ने धरने का रुख अख्तियार कर लिया |
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सरकार तेरी नीति बुरी है, झूठे आशवासन पर जनता मरी है....

शहरी गरीब आवास हमारे लिए नहीं तो, किसके लिएआदि नारों से धरने की शुरुआत मई २०१० से शहीद स्मारक, लखनऊ से हुयी | दिन रात इन लोगों का धरनाजारी है | अपने काम काज छोड़ कर यह लोग धरना दे रहे हैं | इस बार इन लोगों ने प्रण किया है कि हम लोग कोईभी ज्ञापन जैसी चीज नहीं देंगे और ही किसी के झूठे आश्वासन पर अपना धरना समाप्त करेंगे | हमारा धरना समाप्त होगा तो अपना घर लेकर ही | रात- दिन धरने पर ये लोग बैठे हैं और सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोगों कीमदद से इनका पेट भर रहा है | प्रशासन की उदासीनता को देखिये कि जहाँ पर ये लोग धरना दे रहे हैं और शहीदोंकी स्थली शहीद स्मारक पर वैसे भले ही दिन रात बत्तियां जलती हों लेकिन जबसे इन गरीब लोगों ने अपना धरनाशुरू किया है | प्रशासन ने यहाँ की बत्तियां ही बुझा दी हैं | ताकि इन लोगों के साथ कोई भी रात में हमला कर दे, अँधेरा होने से हे लोग अपने घरों में चले जायेंगे | लेकिन प्रशासन शायद ये भूल चुका है कि जिसका घर ही नहीं है वो कहाँ जायेगा और जिसने कभी बिजली-बत्ती का मुख देखा ही नहीं है उनके लिए यह अँधेरा क्या चीज है | लेकिन हमारे प्रशासन और सरकार की मानवता यहीं से साफ़ नजर आती है कि वो कितना मानवीय और संवेदनशील है |

धरने के पहले दिन तो कोई झाकने नहीं आया कि आखिर इन लोगों को क्या तकलीफ है कि यहाँ जमावड़ा लगा के बैठे हैं | दूसरे दिन कुछ सरकारी नौकर आये भी तो, सब के सब नंगे | कोई कह रहा है कि हम ट्रांस गोमती .डी.एम. है, तो कोई कह रहा है कि हम सिटी मजिस्ट्रेट हैं | जब पूंछा गया कि हाँ भाई बताएं कि आप लोग क्यालाये है तो पता चला कि वो नंगे होकर आये है उनके पास केवल वही झूठे आश्वासन है | जिसके कारण आज तक इस भोली-भाली जनता को बहकाते चले आये हैं | वह इस बार भी यही सोंच रहे थे कि चलो हम फिर इस जनता से झूठ बोलेंगे और यह अपना धरना तोड़ देंगे, लेकिन यह शायद उनकी भूल थी | धरना बिलकुल डग-मगाया तक नहीं | इन लोगों के झूठे आशवासन पर धरना प्रदर्शनकारियों का हौसला और भी मजबूत हो गया और उनके इरादे भूख हड़ताल के लिए मजबूत हो रहे हैं | क्यों कि अब इन लोगों ने ठान लिया है कि भूखे, नंगे, बीमार, प्रताड़ित होकर मरने से कहीं अच्छा है कि शहीदों की तरह अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ते मरना कहीं अच्छा है |

लेखक: चुन्नीलाल
(सामाजिक कार्यकर्ता, आशा परिवार)